| Sr No. | Title | Download |
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| 11 | माननीय 44वें अतिरिक्त मुख्य महानगरीय मजिस्ट्रेट न्यायालय, बेंगलुरु द्वारा कर्नाटक राज्य जैव विविधता बोर्ड बनाम मेसर्स प्रधान हर्बल कंपनी एवं अन्य के मामले में दिनांक 25.08.2018 को पारित निर्णय |
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| 12 | माननीय मद्रास उच्च न्यायालय की प्रथम खंडपीठ द्वारा आर. मुरलीधरन द्वारा दायर मूल याचिका संख्या W.P.No.15663/2014 में दिनांक 11.03.2015 को पारित निर्णय। |
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| 13 | माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), प्रधान पीठ, नई दिल्ली द्वारा दिनांक 06.05.2025 को मूल आवेदन संख्या 25/2025 में यशवीर सिंह बनाम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय एवं अन्य के मामले में पारित आदेश, जिसमें मच्छरों के नियंत्रण में प्रयुक्त दो अत्यधिक आक्रामक विदेशी मछली प्रजातियों के मुद्दे की जांच के लिए गठित विशेषज्ञ समिति को छह माह के भीतर मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया। |
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| 14 | माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ), भोपाल द्वारा मूल आवेदन संख्या 28/2013 (कोयला) एवं मूल आवेदन संख्या 17/2014 में दिनांक 06.10.2015 को पारित निर्णय |
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| 15 | Judgment passed by the Hon'ble National Green Tribunal (Central Zonal Bench), Bhopal in original Application No. 06 of 2014 (Biodiversity Management Committee Vs Union of India) & Application No. 6 of 2014 (BMC), Keoti Vs. Union of India) |
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| 16 | माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 22.06.2026 को C.A. संख्या 109/2022 में जैव विविधता अधिनियम (BD Act) और पेटेंट अधिनियम के बीच संबंध के संबंध में निर्णय पारित किया गया। न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) द्वारा मात्र स्वीकृति प्रदान किए जाने का किसी आविष्कार की पेटेंट योग्यता से कोई तर्कसंगत या दूरस्थ संबंध भी नहीं है, क्योंकि पेटेंट योग्यता निर्धारित करना पेटेंट अधिनियम, 1970 का विशिष्ट अधिकार क्षेत्र है। न्यायालय ने आगे कहा कि विधायिका का उद्देश्य ऐसे जैविक संसाधनों के वाणिज्यिक उपयोग से होने वाले राजस्व के बंटवारे के माध्यम से वित्तीय लाभ प्राप्त करना है। |
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